अयोध्याकाण्ड · श्लोक · श्लोक
नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं सीतासमारोपितवामभागम्।
मूल पाठ
नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं सीतासमारोपितवामभागम्।
पाणौ महासायकचारुचापं नमामि रामं रघुवंशनाथम्॥३॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 343, 343
भावार्थ
मूल पाठ के बादनीले कमलके समान श्याम और कोमल जिनके अङ्ग हैं, श्रीसीताजी जिनके वाम भागमें विराजमान हैं और जिनके हाथोंमें [क्रमश:] अमोघ बाण और सुन्दर धनुष है, उन रघुवंशके स्वामी श्रीरामचन्द्रजीको मैं नमस्कार करता हूँ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 343 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं सीतासमारोपितवामभागम्।
English explanation
Whose tender limbs are dark like a blue lotus, and at whose left side Sita is seated—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं | नीलकमल के समान श्याम और कोमल अंगों वाले | with tender limbs dark like a blue lotus |
| सीतासमारोपितवामभागम् | जिनके बाएँ भाग में सीता को विराजित किया गया है | with Sita seated at his left side |
2पाणौ महासायकचारुचापं नमामि रामं रघुवंशनाथम्॥३॥
English explanation
I bow to Rama, lord of Raghu’s lineage, holding a mighty arrow and a beautiful bow in his hand.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाणौ | हाथ में | in the hand |
| महासायकचारुचापं | महान बाण और सुंदर धनुष वाले | bearing a mighty arrow and a beautiful bow |
| नमामि | मैं नमस्कार करता हूँ | I bow to |
| रामं | राम को | to Rama |
| रघुवंशनाथम् | रघुवंश के स्वामी को | to the lord of Raghu’s lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 343
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 343, 343
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