बालकाण्ड · दोहा 360 · दोहा/सोरठा
राम रूपु भूपति भगति ब्याहु उछाहु अनंदु।
मूल पाठ
राम रूपु भूपति भगति ब्याहु उछाहु अनंदु।
जात सराहत मनहिं मन मुदित गाधिकुलचंदु।।360।।
स्रोत अभिलेख 1.36 · पुस्तक पृ. 339, 340
भावार्थ
मूल पाठ के बादगाधिकुलके चन्द्रमा विश्वामित्रजी बड़े हर्षके साथ श्रीरामचन्द्रजीके रूप, राजा दशरथजीकी भक्ति, [चारों भाइयोंके] विवाह और [सबके] उत्साह और आनन्दको मन-ही-मन सराहते जाते हैं॥ ३६०॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 340 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1राम रूपु भूपति भगति ब्याहु उछाहु अनंदु।
English explanation
Rama’s beauty, King Dasharatha’s devotion, and the wedding’s excitement and joy—all these the sage was praising inwardly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम का | Rama’s |
| रूपु | सुंदर रूप | beauty |
| भूपति | राजा दशरथ की | King Dasharatha’s |
| भगति | भक्ति | devotion |
| ब्याहु | विवाह | the wedding |
| उछाहु | उत्साह | excitement |
| अनंदु | आनंद | joy |
2 जात सराहत मनहिं मन मुदित गाधिकुलचंदु।।360।।
English explanation
Vishvamitra, the moon of Gadhi’s lineage, departed joyfully, praising all these things within his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जात | जाते हुए | while departing |
| सराहत | सराहते हुए | praising |
| मनहिं | मन ही में | within his heart |
| मन | मन में; भीतर ही | inwardly |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| गाधिकुलचंदु | गाधि-कुल के चंद्रमा, विश्वामित्र | Vishvamitra, the moon of Gadhi’s lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 360
- स्रोत अभिलेख
- 1.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 340
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 339, 340
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