बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बामदेव रघुकुल गुर ग्यानी। बहुरि गाधिसुत कथा बखानी।।
मूल पाठ
बामदेव रघुकुल गुर ग्यानी। बहुरि गाधिसुत कथा बखानी।।
सुनि मुनि सुजसु मनहिं मन राऊ। बरनत आपन पुन्य प्रभाऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.361 · पुस्तक पृ. 340, 341
भावार्थ
मूल पाठ के बादवामदेवजी और रघुकुलके गुरु ज्ञानी वसिष्ठजीने फिर विश्वामित्रजीकी कथा बखानकर कही। मुनिका सुन्दर यश सुनकर राजा मन-ही-मन अपने पुण्योंके प्रभावका बखान करने लगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 340 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बामदेव रघुकुल गुर ग्यानी। बहुरि गाधिसुत कथा बखानी।।
English explanation
AI-generated draft: Vamadeva and Vasishtha, the wise preceptor of Raghu’s lineage, then recounted the story of Vishvamitra, Gadhi’s son.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बामदेव | ऋषि वामदेव | the sage Vamadeva |
| रघुकुल | रघु का राजवंश | Raghu’s royal lineage |
| गुर | गुरु वसिष्ठ | the preceptor Vasishtha |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
| बहुरि | फिर | then; again |
| गाधिसुत | गाधि के पुत्र विश्वामित्र की | of Vishvamitra, son of Gadhi |
| कथा | कथा | story |
| बखानी | सुनाई; वर्णन किया | recounted |
2 सुनि मुनि सुजसु मनहिं मन राऊ। बरनत आपन पुन्य प्रभाऊ।।
English explanation
Hearing the sage Vishvamitra’s noble renown, King Dasharatha inwardly praised the power of his own accumulated merit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मुनि | मुनि विश्वामित्र का | of the sage Vishvamitra |
| सुजसु | सुंदर यश | noble renown |
| मनहिं | मन में ही | within the mind itself |
| मन | मन; भीतर | mind; inwardly |
| राऊ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| बरनत | बखान करने लगे | began praising |
| आपन | अपने | his own |
| पुन्य | पुण्य का | of accumulated merit |
| प्रभाऊ | प्रभाव | power; efficacy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.361
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 340
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द · श्रीरामचरित सुनने-गानेकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 340, 341
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।