बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दीन्ह असीस बिप्र बहु भाँती। चले न प्रीति रीति कहि जाती।।
मूल पाठ
दीन्ह असीस बिप्र बहु भाँती। चले न प्रीति रीति कहि जाती।।
रामु सप्रेम संग सब भाई। आयसु पाइ फिरे पहुँचाई।।
स्रोत अभिलेख 1.36 · पुस्तक पृ. 339, 340
भावार्थ
मूल पाठ के बादब्राह्मण विश्वामित्रजीने बहुत प्रकारसे आशीर्वाद दिये और वे चल पड़े, प्रीतिकी रीति कही नहीं जाती। सब भाइयोंको साथ लेकर श्रीरामजी प्रेमके साथ उन्हें पहुँचाकर और आज्ञा पाकर लौटे॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 340 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दीन्ह असीस बिप्र बहु भाँती। चले न प्रीति रीति कहि जाती।।
English explanation
The Brahmin sage gave blessings in many ways and departed. The manner in which their love was expressed cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दीन्ह | दिए | gave |
| असीस | आशीर्वाद | blessings |
| बिप्र | ब्राह्मण मुनि विश्वामित्र | the Brahmin sage Vishvamitra |
| बहु | अनेक | many |
| भाँती | प्रकार से | in ways |
| चले | प्रस्थान किया | departed |
| न | नहीं | not |
| प्रीति | प्रेम की | of love |
| रीति | रीति; व्यवहार | manner of expression |
| कहि | कही | described |
| जाती | जा सकती | can be |
2 रामु सप्रेम संग सब भाई। आयसु पाइ फिरे पहुँचाई।।
English explanation
Rama lovingly escorted the sage with all his brothers, then returned after receiving his permission.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | राम | Rama |
| सप्रेम | प्रेमपूर्वक | lovingly |
| संग | साथ | with |
| सब | सभी | all |
| भाई | भाई | his brothers |
| आयसु | अनुमति | permission |
| पाइ | पाकर | having received |
| फिरे | लौट आए | returned |
| पहुँचाई | पहुँचाकर; विदा करने साथ जाकर | having escorted him on his way |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 340
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 339, 340
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।