बालकाण्ड · सोरठा 93 · सोरठा
नाचहिं गावहिं गीत परम तरंगी भूत सब।
नाचहिं गावहिं गीत परम तरंगी भूत सब।
देखत अति बिपरीत बोलहिं बचन बिचित्र बिधि॥ ९३॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.93 · पुस्तक पृ. 106, 107
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1नाचहिं गावहिं गीत परम तरंगी भूत सब।
सभी भूत बड़े मौजी होकर नाचते और गीत गाते हैं।
English explanation
All the spirits, exceedingly merry and exuberant, dance and sing songs.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाचहिं | नाचते हैं | dance |
| गावहिं | गाते हैं | sing |
| गीत | गीत | songs |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| तरंगी | मौजी, उमंग से भरे | merry, exuberant |
| भूत | भूत, प्रेतात्माएँ | ghosts, spirits |
| सब | सभी | all |
2देखत अति बिपरीत बोलहिं बचन बिचित्र बिधि॥ ९३॥
वे देखने में अत्यंत विचित्र हैं और अनोखे ढंग से बातें बोलते हैं।
English explanation
They look exceedingly strange and speak in peculiar ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखत | देखने में | in appearance |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| बिपरीत | विचित्र, असामान्य | strange, outlandish |
| बोलहिं | बोलते हैं | speak |
| बचन | बातें, वचन | words, utterances |
| बिचित्र | अनोखे, विचित्र | peculiar, unusual |
| बिधि | ढंग से | in ways |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- सोरठा 93
- स्रोत अभिलेख
- 1.93
- सहायक विषय
- देवताओंका शिवजीसे ब्याहके लिये प्रार्थना करना, सप्तर्षियोंका पार्वतीके पास जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 106, 107
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।