बालकाण्ड · सोरठा 85 · सोरठा
धरी न काहूँ धीर सब के मन मनसिज हरे।
धरी न काहूँ धीर सब के मन मनसिज हरे।
जे राखे रघुबीर ते उबरे तेहि काल महँु॥ ८५॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.85 · पुस्तक पृ. 99, 100
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1धरी न काहूँ धीर सब के मन मनसिज हरे।
किसी ने धैर्य नहीं रखा; कामदेव ने सबके मन हर लिए।
English explanation
No one retained composure; the god of desire seized everyone’s mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरी | धारण किया, बनाए रखा | held onto, retained |
| न | नहीं | not |
| काहूँ | किसी ने | anyone |
| धीर | धैर्य या संयम | composure or self-restraint |
| सब | सभी | everyone |
| के | के | of |
| मन | मन | minds |
| मनसिज | कामदेव, मन से जन्मे देव | the god of desire, the mind-born one |
| हरे | हर लिए, वश में कर लिए | captured, took over |
2 जे राखे रघुबीर ते उबरे तेहि काल महँु॥ ८५॥
जिनकी रक्षा रघुवीर श्रीराम ने की, वे उस समय इस प्रभाव से बच गए।
English explanation
Those whom Rama, the hero of Raghu’s lineage, protected escaped this influence at that time.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जिन्हें | those whom |
| राखे | बचाया, रक्षा की | protected |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर श्रीराम ने | Rama, the hero of Raghu’s lineage |
| ते | वे | they |
| उबरे | बच गए | escaped |
| तेहि | उस | that |
| काल | समय | time |
| महँु | में | in, during |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- सोरठा 85
- स्रोत अभिलेख
- 1.85
- सहायक विषय
- कामदेवका देवकार्यके लिये जाना और भस्म होना
- मुद्रित पृष्ठ
- 99, 100
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।