बालकाण्ड · दोहा 84 · दोहा
जे सजीव जग अचर चर नारि पुरुष अस नाम।
जे सजीव जग अचर चर नारि पुरुष अस नाम।
ते निज निज मरजाद तजि भए सकल बस काम॥ ८४॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.84 · पुस्तक पृ. 98, 99
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जे सजीव जग अचर चर नारि पुरुष अस नाम।
संसार में जितने सजीव प्राणी हैं—स्थावर और चलने-फिरने वाले, स्त्री और पुरुष नाम से जाने जाने वाले—
English explanation
All living beings in the world—stationary and moving, those known as female and male—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो भी; जितने | all those who |
| सजीव | जीवित प्राणी | living beings |
| जग | संसार में | in the world |
| अचर | न चलने वाले; स्थावर | stationary; non-moving |
| चर | चलने-फिरने वाले | moving; mobile |
| नारि | स्त्री | female |
| पुरुष | पुरुष | male |
| अस | ऐसे | such |
| नाम | नामों से जाने जाने वाले | known by these names |
2ते निज निज मरजाद तजि भए सकल बस काम॥ ८४॥
वे सभी अपनी-अपनी मर्यादा छोड़कर काम के वश में हो गए।
English explanation
They all abandoned their respective bounds of conduct and came under the sway of desire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | they |
| निज | अपनी | their own |
| निज | अपनी; प्रत्येक की अलग | respective; each one’s own |
| मरजाद | मर्यादा; आचरण की सीमा | proper bounds of conduct |
| तजि | छोड़कर | having abandoned |
| भए | हो गए | became |
| सकल | सभी | all |
| बस | वश में; अधीन | under the sway |
| काम | काम; कामना और उसके देवता का प्रभाव | desire; the influence of Kama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 84
- स्रोत अभिलेख
- 1.84
- सहायक विषय
- कामदेवका देवकार्यके लिये जाना और भस्म होना
- मुद्रित पृष्ठ
- 98, 99
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