बालकाण्ड · दोहा 83 · दोहा/सोरठा
सुरन्ह कहीं निज बिपति सब सुनि मन कीन्ह बिचार।
सुरन्ह कहीं निज बिपति सब सुनि मन कीन्ह बिचार।
संभु बिरोध न कुसल मोहि बिहसि कहेउ अस मार।।83।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.83 · पुस्तक पृ. 97, 98
भावार्थ और शब्दार्थ
1सुरन्ह कहीं निज बिपति सब सुनि मन कीन्ह बिचार।
देवताओं ने अपनी सारी विपत्ति बताई; उसे सुनकर कामदेव ने मन में विचार किया।
English explanation
The gods related their entire plight; hearing it, the god of desire reflected inwardly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुरन्ह | देवताओं ने | the gods |
| कहीं | कही; बताई | related; told |
| निज | अपनी | their own |
| बिपति | विपत्ति | plight; distress |
| सब | सारी | entire |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मन | मन में | in his mind |
| कीन्ह | किया | undertook |
| बिचार | विचार | reflection |
2 संभु बिरोध न कुसल मोहि बिहसि कहेउ अस मार।।83।।
‘शंभु से विरोध करने में मेरा भला नहीं है।’ ऐसा विचार कर कामदेव ने मुसकराकर इस प्रकार कहा।
English explanation
“Opposing Shiva will not bode well for me.” Having reflected thus, the god of desire smiled and spoke as follows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संभु | शंभु; शिव से | Shambhu, Shiva |
| बिरोध | विरोध करने में | in opposing |
| न | नहीं | not |
| कुसल | कुशल; भलाई | well-being; a good outcome |
| मोहि | मेरे लिए | for me |
| बिहसि | मुसकराकर | having smiled |
| कहेउ | कहा | said |
| अस | इस प्रकार | thus; as follows |
| मार | कामदेव ने | the god of desire |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 83
- स्रोत अभिलेख
- 1.83
- सहायक विषय
- सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
- मुद्रित पृष्ठ
- 97, 98
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