बालकाण्ड · दोहा 86 · दोहा
सकल कला करि कोटि बिधि हारेउ सेन समेत।
सकल कला करि कोटि बिधि हारेउ सेन समेत।
चली न अचल समाधि सिव कोपेउ हृदयनिकेत॥ ८६॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.86 · पुस्तक पृ. 100, 101
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सकल कला करि कोटि बिधि हारेउ सेन समेत।
करोड़ों प्रकार से सारी कलाएँ आजमाकर कामदेव अपनी सेना सहित हार गया।
English explanation
After trying all his arts in countless ways, the god of love was defeated along with his army.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सभी | all |
| कला | कलाएँ और युक्तियाँ | arts and devices |
| करि | आजमाकर | having employed |
| कोटि | करोड़ों | countless |
| बिधि | प्रकारों से | in ways |
| हारेउ | हार गया | was defeated |
| सेन | सेना | army |
| समेत | सहित | along with |
2चली न अचल समाधि सिव कोपेउ हृदयनिकेत॥ ८६॥
शिव की अचल समाधि नहीं डिगी; हृदय में निवास करने वाला कामदेव क्रोधित हो उठा।
English explanation
Shiva’s steadfast meditative absorption did not waver; the god of love, who dwells in the heart, grew angry.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चली | डिगी या विचलित हुई | wavered or was disturbed |
| न | नहीं | not |
| अचल | अडिग | steadfast |
| समाधि | गहन ध्यानावस्था | meditative absorption |
| सिव | भगवान शिव की | of Lord Shiva |
| कोपेउ | क्रोधित हुआ | grew angry |
| हृदयनिकेत | हृदय में निवास करने वाला कामदेव | the god of love, whose dwelling is the heart |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 86
- स्रोत अभिलेख
- 1.86
- सहायक विषय
- कामदेवका देवकार्यके लिये जाना और भस्म होना
- मुद्रित पृष्ठ
- 100, 101
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।