बालकाण्ड · दोहा 87 · दोहा
अब तें रति तव नाथ कर होइहि नामु अनंगु।
अब तें रति तव नाथ कर होइहि नामु अनंगु।
बिनु बपु ब्यापिहि सबहि पुनि सुनु निज मिलन प्रसंगु॥ ८७॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.87 · पुस्तक पृ. 101, 102
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1अब तें रति तव नाथ कर होइहि नामु अनंगु।
हे रति, अब से तुम्हारे पति का नाम अनंग, अर्थात् शरीररहित, होगा।
English explanation
Rati, from now on your husband will be called Ananga, meaning ‘bodiless.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| तें | से | from |
| रति | हे रति | O Rati |
| तव | तुम्हारे | your |
| नाथ | पति कामदेव | husband, the god of desire |
| कर | का | of |
| होइहि | होगा | will be |
| नामु | नाम | name |
| अनंगु | अनंग; शरीररहित | Ananga; the bodiless one |
2बिनु बपु ब्यापिहि सबहि पुनि सुनु निज मिलन प्रसंगु॥ ८७॥
वह बिना शरीर के सबमें व्याप्त होगा। फिर अपने उससे मिलन का प्रसंग सुनो।
English explanation
Without a body, he will pervade everyone. Now hear about your reunion with him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| बपु | शरीर | a body |
| ब्यापिहि | व्याप्त होगा | will pervade |
| सबहि | सबमें | everyone |
| पुनि | फिर; आगे | then; next |
| सुनु | सुनो | listen; hear |
| निज | अपने | your own |
| मिलन | मिलन | reunion |
| प्रसंगु | प्रसंग; विवरण | account; circumstances |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 87
- स्रोत अभिलेख
- 1.87
- सहायक विषय
- कामदेवका देवकार्यके लिये जाना और भस्म होना · रतिको वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 101, 102
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।