बालकाण्ड · दोहा 88 · दोहा/सोरठा
सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु।
सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु।
निज नयनन्हि देखा चहहिं नाथ तुम्हार बिबाहु।।88।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.88 · पुस्तक पृ. 103, 103
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु।
हे शंकर, सभी देवताओं के हृदय में ऐसी प्रबल उत्सुकता है—
English explanation
O Shankara, all the gods have this intense eagerness in their hearts—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सभी | all |
| सुरन्ह | देवताओं | the gods |
| के | के | of |
| हृदयँ | हृदय में | in the hearts |
| अस | ऐसी | such |
| संकर | हे शंकर | O Shankara (Shiva) |
| परम | अत्यंत | intense |
| उछाहु | उत्साह; उत्सुकता | eagerness |
2 निज नयनन्हि देखा चहहिं नाथ तुम्हार बिबाहु।।88।।
हे नाथ, वे अपनी आँखों से आपका विवाह देखना चाहते हैं।
English explanation
O Lord, they wish to see your wedding with their own eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपनी | their own |
| नयनन्हि | आँखों से | with eyes |
| देखा | देखना | to see |
| चहहिं | चाहते हैं | wish |
| नाथ | हे नाथ | O Lord |
| तुम्हार | आपका | your |
| बिबाहु | विवाह | wedding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 88
- स्रोत अभिलेख
- 1.88
- सहायक विषय
- देवताओंका शिवजीसे ब्याहके लिये प्रार्थना करना, सप्तर्षियोंका पार्वतीके पास जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 103, 103
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।