बालकाण्ड · सोरठा 336 · सोरठा
तुम्ह परिपूरन काम जान सिरोमनि भावप्रिय।
तुम्ह परिपूरन काम जान सिरोमनि भावप्रिय।
जन गुन गाहक राम दोष दलन करुनायतन॥ ३३६॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.336 · पुस्तक पृ. 320, 320
भावार्थ और शब्दार्थ
1तुम्ह परिपूरन काम जान सिरोमनि भावप्रिय।
आपकी सभी इच्छाएँ पूर्ण हैं; आप ज्ञान के शिरोमणि हैं और आपको सच्चा भाव प्रिय है।
English explanation
All your desires are fulfilled; you are the crown jewel of wisdom, and sincere feeling is dear to you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप | you |
| परिपूरन | पूरी तरह पूर्ण | completely fulfilled |
| काम | इच्छाएँ | desires |
| जान | ज्ञान | wisdom |
| सिरोमनि | शिरोमणि; सर्वश्रेष्ठ | crown jewel; foremost |
| भावप्रिय | जिन्हें सच्चा भाव प्रिय है | one who cherishes sincere feeling |
2 जन गुन गाहक राम दोष दलन करुनायतन॥ ३३६॥
हे राम, आप अपने सेवकों के गुणों को स्वीकार करने वाले, दोषों का नाश करने वाले और करुणा के धाम हैं।
English explanation
O Rama, you appreciate your servants' virtues, destroy faults, and are the abode of compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जन | सेवकों के | of your servants |
| गुन | गुण | virtues |
| गाहक | स्वीकार और सराहना करने वाले | one who recognizes and appreciates |
| राम | हे राम | O Rama |
| दोष | दोषों का | of faults |
| दलन | नाश करने वाले | destroyer |
| करुनायतन | करुणा के धाम | abode of compassion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- सोरठा 336
- स्रोत अभिलेख
- 1.336
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 320, 320
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।