बालकाण्ड · दोहा 337 · दोहा/सोरठा
प्रेमबिबस नर नारि सब सखिन्ह सहित रनिवासु।
प्रेमबिबस नर नारि सब सखिन्ह सहित रनिवासु।
मानहुँ कीन्ह बिदेहपुर करुनाँ बिरहँ निवासु।।337।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.337 · पुस्तक पृ. 321, 321
भावार्थ और शब्दार्थ
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1प्रेमबिबस नर नारि सब सखिन्ह सहित रनिवासु।
सभी नर-नारी और सखियों सहित पूरा रानीवास प्रेम से विवश था।
English explanation
All the men and women, and the entire queens’ household with the companions, were overwhelmed by love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेमबिबस | प्रेम से विवश | overwhelmed by love |
| नर | पुरुष | men |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| सब | सभी | all |
| सखिन्ह | सखियों के | the female companions |
| सहित | साथ | with |
| रनिवासु | रानियों का अंतःपुर और उसके निवासी | the queens’ household |
2 मानहुँ कीन्ह बिदेहपुर करुनाँ बिरहँ निवासु।।337।।
मानो करुणा और विरह ने विदेह की नगरी में अपना निवास बना लिया हो।
English explanation
It was as though sorrow and separation had made their home in the city of Videha.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मानहुँ | मानो | as though |
| कीन्ह | बना लिया | had made |
| बिदेहपुर | विदेह की नगरी जनकपुर में | in Janakpur, the city of Videha |
| करुनाँ | करुणा, करुण दुःख ने | sorrow |
| बिरहँ | विरह, बिछोह ने | separation |
| निवासु | निवास | a home |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 337
- स्रोत अभिलेख
- 1.337
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 321, 321
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