बालकाण्ड · दोहा 338 · दोहा/सोरठा
प्रेमबिबस परिवारु सबु जानि सुलगन नरेस।
प्रेमबिबस परिवारु सबु जानि सुलगन नरेस।
कुँअरि चढ़ाई पालकिन्ह सुमिरे सिद्धि गनेस।।338।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.338 · पुस्तक पृ. 321, 322
भावार्थ और शब्दार्थ
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1प्रेमबिबस परिवारु सबु जानि सुलगन नरेस।
सारा परिवार प्रेम से विवश था; राजा ने शुभ लग्न का समय जानकर—
English explanation
The whole family was overwhelmed by love; the king, recognizing the auspicious time—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेमबिबस | प्रेम के वश में | overwhelmed by love |
| परिवारु | परिवार | family |
| सबु | सारा | the whole |
| जानि | जानकर | recognizing |
| सुलगन | शुभ लग्न का समय | the auspicious time |
| नरेस | राजा जनक ने | King Janaka |
2 कुँअरि चढ़ाई पालकिन्ह सुमिरे सिद्धि गनेस।।338।।
राजकुमारियों को पालकियों में बैठाया और सिद्धि तथा गणेश का स्मरण किया।
English explanation
He seated the princesses in the palanquins and invoked Siddhi and Ganesha.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुँअरि | राजकुमारियों को | the princesses |
| चढ़ाई | बैठाया | seated |
| पालकिन्ह | पालकियों में | in palanquins |
| सुमिरे | स्मरण किया | invoked |
| सिद्धि | सिद्धि, सफलता की देवी | Siddhi, personified success |
| गनेस | भगवान गणेश | Ganesha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 338
- स्रोत अभिलेख
- 1.338
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 321, 322
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