बालकाण्ड · दोहा 339 · दोहा/सोरठा
सुर प्रसून बरषहि हरषि करहिं अपछरा गान।
सुर प्रसून बरषहि हरषि करहिं अपछरा गान।
चले अवधपति अवधपुर मुदित बजाइ निसान।।339।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.339 · पुस्तक पृ. 322, 323
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुर प्रसून बरषहि हरषि करहिं अपछरा गान।
देवता फूल बरसाते हैं और अप्सराएँ हर्षपूर्वक गान करती हैं।
English explanation
The gods shower flowers, and the celestial maidens sing joyfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवता | gods |
| प्रसून | फूल | flowers |
| बरषहि | बरसाते हैं | shower |
| हरषि | हर्षित होकर | joyfully |
| करहिं | करती हैं | perform |
| अपछरा | अप्सराएँ; स्वर्ग की नर्तकियाँ | celestial maidens |
| गान | गान | singing |
2 चले अवधपति अवधपुर मुदित बजाइ निसान।।339।।
अयोध्या के राजा दशरथ प्रसन्न होकर नगाड़े बजवाते हुए अयोध्या की ओर चले।
English explanation
Dasharatha, king of Ayodhya, joyfully departed for Ayodhya with kettledrums sounding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चले; प्रस्थान किया | departed |
| अवधपति | अयोध्या के राजा दशरथ | Dasharatha, king of Ayodhya |
| अवधपुर | अयोध्या नगर की ओर | toward the city of Ayodhya |
| मुदित | प्रसन्न होकर | joyfully |
| बजाइ | बजाकर; बजवाकर | sounding; having sounded |
| निसान | नगाड़े | kettledrums |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 339
- स्रोत अभिलेख
- 1.339
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 322, 323
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