बालकाण्ड · दोहा 340 · दोहा/सोरठा
कोसलपति समधी सजन सनमाने सब भाँति।
कोसलपति समधी सजन सनमाने सब भाँति।
मिलनि परसपर बिनय अति प्रीति न हृदयँ समाति।।340।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.34 · पुस्तक पृ. 323, 324
भावार्थ और शब्दार्थ
1कोसलपति समधी सजन सनमाने सब भाँति।
कोसल के राजा दशरथ ने अपने समधी और प्रिय संबंधी जनक का हर प्रकार से सम्मान किया।
English explanation
Dasharatha, king of Kosala, honored Janaka, his fellow parent-in-law and dear kinsman, in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोसलपति | कोसल के राजा दशरथ | Dasharatha, king of Kosala |
| समधी | समधी जनक को | Janaka, his fellow parent-in-law |
| सजन | प्रिय संबंधी को | his dear kinsman |
| सनमाने | सम्मानित किया | honored |
| सब | सभी | every |
| भाँति | प्रकार से | way |
2 मिलनि परसपर बिनय अति प्रीति न हृदयँ समाति।।340।।
मिलते समय दोनों ने अत्यंत विनम्रता से एक-दूसरे का आदर किया; उनका प्रेम इतना था कि हृदय में समाता न था।
English explanation
At their meeting they showed great humility toward each other; their affection was too abundant for their hearts to contain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिलनि | मिलने के समय | at their meeting |
| परसपर | एक-दूसरे के प्रति | toward each other |
| बिनय | विनम्र आदर | humble courtesy |
| अति | अत्यधिक | very great |
| प्रीति | प्रेम | affection |
| न | नहीं | not |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| समाति | समाता है | can be contained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 340
- स्रोत अभिलेख
- 1.34
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 323, 324
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।