बालकाण्ड · दोहा 341 · दोहा/सोरठा
नयन बिषय मो कहुँ भयउ सो समस्त सुख मूल।
नयन बिषय मो कहुँ भयउ सो समस्त सुख मूल।
सबइ लाभु जग जीव कहँ भएँ ईसु अनुकुल।।341।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.341 · पुस्तक पृ. 324, 324
भावार्थ और शब्दार्थ
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1नयन बिषय मो कहुँ भयउ सो समस्त सुख मूल।
वही समस्त सुखों के मूल आज मेरी आँखों के सामने प्रत्यक्ष हुए हैं।
English explanation
That very source of all happiness has become directly visible to my eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नयन | आँखों का | of the eyes |
| बिषय | प्रत्यक्ष विषय | object of direct sight |
| मो | मेरे लिए | for me |
| कहुँ | को | to |
| भयउ | हुए | has become |
| सो | वही | that very one |
| समस्त | समस्त | all |
| सुख | सुखों का | happiness |
| मूल | मूल | source |
2 सबइ लाभु जग जीव कहँ भएँ ईसु अनुकुल।।341।।
ईश्वर के अनुकूल होने पर संसार में जीव को सभी लाभ प्राप्त होते हैं।
English explanation
When the Lord is favorable, a living being gains every benefit in the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सबइ | सभी | all |
| लाभु | लाभ | benefits |
| जग | संसार में | in the world |
| जीव | जीव | a living being |
| कहँ | को | to |
| भएँ | होने पर | upon becoming |
| ईसु | ईश्वर | the Lord |
| अनुकुल | अनुकूल | favorable |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 341
- स्रोत अभिलेख
- 1.341
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 324, 324
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