बालकाण्ड · दोहा 342 · दोहा/सोरठा
मिले लखन रिपुसूदनहि दीन्हि असीस महीस।
मिले लखन रिपुसूदनहि दीन्हि असीस महीस।
भए परस्पर प्रेमबस फिरि फिरि नावहिं सीस।।342।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.342 · पुस्तक पृ. 325, 325
भावार्थ और शब्दार्थ
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1मिले लखन रिपुसूदनहि दीन्हि असीस महीस।
राजा जनक लक्ष्मण और शत्रुघ्न से मिले और उन्हें आशीर्वाद दिया।
English explanation
King Janaka met Lakshmana and Shatrughna and blessed them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिले | मिले | met |
| लखन | राम के भाई लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| रिपुसूदनहि | शत्रुओं का नाश करने वाले शत्रुघ्न से; उन्हें | Shatrughna, destroyer of foes; to him |
| दीन्हि | दिया | gave |
| असीस | आशीर्वाद | blessing |
| महीस | राजा जनक | King Janaka |
2 भए परस्पर प्रेमबस फिरि फिरि नावहिं सीस।।342।।
सब परस्पर प्रेम के वश हो गए और बार-बार सिर झुकाने लगे।
English explanation
Overcome by mutual love, they bowed their heads again and again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए | became |
| परस्पर | एक-दूसरे के प्रति; परस्पर | mutually; toward one another |
| प्रेमबस | प्रेम के वश में | overcome by love |
| फिरि | फिर | again |
| फिरि | फिर; बार-बार | again; repeatedly |
| नावहिं | झुकाते हैं | bow |
| सीस | सिर | their heads |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 342
- स्रोत अभिलेख
- 1.342
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 325, 325
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