बालकाण्ड · दोहा 343 · दोहा/सोरठा
बीच बीच बर बास करि मग लोगन्ह सुख देत।
बीच बीच बर बास करि मग लोगन्ह सुख देत।
अवध समीप पुनीत दिन पहुँची आइ जनेत।।343।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.343 · पुस्तक पृ. 325, 326
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बीच बीच बर बास करि मग लोगन्ह सुख देत।
बीच-बीच में अच्छे पड़ावों पर ठहरते हुए और मार्ग के लोगों को सुख देते हुए—
English explanation
Making pleasant halts along the way and bringing joy to the people on the route—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बीच | बीच | at intervals |
| बीच | बीच; मिलकर: बीच-बीच में | at intervals; together: from time to time |
| बर | उत्तम; अच्छे | fine; pleasant |
| बास | ठहराव; पड़ाव | halts; stays |
| करि | करके; करते हुए | making |
| मग | मार्ग के | along the route |
| लोगन्ह | लोगों को | to the people |
| सुख | सुख | joy |
| देत | देते हुए | giving |
2 अवध समीप पुनीत दिन पहुँची आइ जनेत।।343।।
बरात एक शुभ दिन आकर अयोध्या के समीप पहुँची।
English explanation
On an auspicious day, the wedding procession arrived near Ayodhya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवध | अयोध्या के | of Ayodhya |
| समीप | निकट | near |
| पुनीत | पवित्र; शुभ | holy; auspicious |
| दिन | दिन | day |
| पहुँची | पहुँची | arrived |
| आइ | आकर | having come |
| जनेत | बरात | wedding procession |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 343
- स्रोत अभिलेख
- 1.343
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 325, 326
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