बालकाण्ड · दोहा 335 · दोहा/सोरठा
रूप सिंधु सब बंधु लखि हरषि उठा रनिवासु।
रूप सिंधु सब बंधु लखि हरषि उठा रनिवासु।
करहि निछावरि आरती महा मुदित मन सासु।।335।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.335 · पुस्तक पृ. 319, 319
भावार्थ और शब्दार्थ
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1रूप सिंधु सब बंधु लखि हरषि उठा रनिवासु।
सौंदर्य के सागर सभी भाइयों को देखकर रानियों का अंतःपुर हर्ष से भर उठा।
English explanation
Seeing all the brothers, oceans of beauty, the queens' household burst into joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रूप | सौंदर्य के | of beauty |
| सिंधु | सागर | oceans |
| सब | सभी | all |
| बंधु | भाइयों को | the brothers |
| लखि | देखकर | on seeing |
| हरषि | हर्षित हो | with joy |
| उठा | उठा | burst forth |
| रनिवासु | रानियों का अंतःपुर | the queens' household |
2 करहि निछावरि आरती महा मुदित मन सासु।।335।।
अत्यंत प्रसन्न मन से सासुएँ निछावर और आरती करती हैं।
English explanation
With hearts full of delight, the mothers-in-law make ceremonial offerings and perform the welcoming lamp ritual.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहि | करती हैं | perform |
| निछावरि | मंगलार्थ न्योछावर | ceremonial offerings |
| आरती | दीप घुमाकर मंगल-स्वागत | a welcoming ritual with lamps |
| महा | अत्यंत | greatly |
| मुदित | प्रसन्न | delighted |
| मन | मन से | at heart |
| सासु | सासुएँ | the mothers-in-law |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 335
- स्रोत अभिलेख
- 1.335
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 319, 319
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