बालकाण्ड · दोहा 334 · दोहा/सोरठा
तेहि अवसर भाइन्ह सहित रामु भानु कुल केतु।
तेहि अवसर भाइन्ह सहित रामु भानु कुल केतु।
चले जनक मंदिर मुदित बिदा करावन हेतु।।334।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.334 · पुस्तक पृ. 318, 319
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तेहि अवसर भाइन्ह सहित रामु भानु कुल केतु।
उस समय भाइयों सहित सूर्यवंश के ध्वजस्वरूप राम—
English explanation
At that time Rama, the banner of the solar dynasty, together with his brothers—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस | that |
| अवसर | समय | time |
| भाइन्ह | भाइयों के | his brothers |
| सहित | साथ | together with |
| रामु | राम | Rama |
| भानु | सूर्य के | of the sun |
| कुल | वंश के | of the dynasty |
| केतु | ध्वजस्वरूप गौरव | banner and glory |
2 चले जनक मंदिर मुदित बिदा करावन हेतु।।334।।
प्रसन्न होकर विदाई लेने के लिए जनक के महल को चले।
English explanation
Joyfully went to Janaka's palace to take their leave.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चले | went |
| जनक | राजा जनक के | King Janaka's |
| मंदिर | महल को | to the palace |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| बिदा | विदाई | leave-taking |
| करावन | करवाने | to arrange |
| हेतु | के लिए | for the purpose of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 334
- स्रोत अभिलेख
- 1.334
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 318, 319
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