बालकाण्ड · दोहा 333 · दोहा/सोरठा
दाइज अमित न सकिअ कहि दीन्ह बिदेहँ बहोरि।
दाइज अमित न सकिअ कहि दीन्ह बिदेहँ बहोरि।
जो अवलोकत लोकपति लोक संपदा थोरि।।333।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.333 · पुस्तक पृ. 317, 318
भावार्थ और शब्दार्थ
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1दाइज अमित न सकिअ कहि दीन्ह बिदेहँ बहोरि।
फिर विदेहराज जनक ने इतना अपार विवाहोपहार दिया कि उसका वर्णन नहीं किया जा सकता।
English explanation
Then Janaka, king of Videha, gave wedding gifts so immense that they cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दाइज | विवाह में दिया गया दहेज या उपहार | dowry; wedding gifts |
| अमित | अपरिमित | immeasurable |
| न | नहीं | not |
| सकिअ | कहा जा सकता | can be |
| कहि | कहकर; वर्णन करके | stated; described |
| दीन्ह | दिया | gave |
| बिदेहँ | विदेहराज जनक ने | Janaka, king of Videha |
| बहोरि | फिर; इसके बाद | then; thereafter |
2 जो अवलोकत लोकपति लोक संपदा थोरि।।333।।
उन उपहारों को देखकर लोकों के अधिपतियों को भी अपने लोकों की संपदा थोड़ी लगी।
English explanation
Seeing those gifts, even the rulers of the worlds considered the wealth of their own realms meager.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जिसे; उस उपहार-संपदा को | which; those gifts |
| अवलोकत | देखते हुए; देखकर | on beholding |
| लोकपति | लोकों के अधिपति | rulers of the worlds |
| लोक | अपने लोकों की | of their own realms |
| संपदा | धन-संपत्ति | wealth |
| थोरि | थोड़ी; अल्प | little; meager |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 333
- स्रोत अभिलेख
- 1.333
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 317, 318
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