बालकाण्ड · दोहा 332 · दोहा/सोरठा
अवधनाथु चाहत चलन भीतर करहु जनाउ।
अवधनाथु चाहत चलन भीतर करहु जनाउ।
भए प्रेमबस सचिव सुनि बिप्र सभासद राउ।।332।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.332 · पुस्तक पृ. 317, 317
भावार्थ और शब्दार्थ
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1अवधनाथु चाहत चलन भीतर करहु जनाउ।
अवधपति दशरथ प्रस्थान करना चाहते हैं; इसकी सूचना भीतर अंतःपुर में दे दो।
English explanation
Dasharatha, lord of Ayodhya, wishes to depart; convey this news inside the royal household.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवधनाथु | अवध के राजा दशरथ | Dasharatha, lord of Ayodhya |
| चाहत | चाहते हैं | wishes |
| चलन | प्रस्थान करना | to depart |
| भीतर | भीतर अंतःपुर में | inside the royal household |
| करहु | करो; दे दो | give; convey |
| जनाउ | सूचना | notification |
2 भए प्रेमबस सचिव सुनि बिप्र सभासद राउ।।332।।
यह सुनकर मंत्री, ब्राह्मण, सभासद और राजा जनक प्रेम से विवश हो गए।
English explanation
Hearing this, the ministers, Brahmins, courtiers, and King Janaka were overcome by affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए | became |
| प्रेमबस | प्रेम के वश में; प्रेम से विवश | overcome by affection |
| सचिव | मंत्री | ministers |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| बिप्र | ब्राह्मण | Brahmins |
| सभासद | राजसभा के सदस्य | members of the royal court |
| राउ | राजा जनक | King Janaka |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 332
- स्रोत अभिलेख
- 1.332
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 317, 317
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