बालकाण्ड · दोहा 331 · दोहा/सोरठा
बार बार कौसिक चरन सीसु नाइ कह राउ।
बार बार कौसिक चरन सीसु नाइ कह राउ।
यह सबु सुखु मुनिराज तव कृपा कटाच्छ पसाउ।।331।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.331 · पुस्तक पृ. 316, 317
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1बार बार कौसिक चरन सीसु नाइ कह राउ।
विश्वामित्र के चरणों में बार-बार सिर झुकाकर राजा बोले।
English explanation
Bowing his head repeatedly at Vishvamitra’s feet, the king spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार, पुनः | again |
| कौसिक | कुशिक वंश के ऋषि विश्वामित्र के | of Vishvamitra, sage of Kushika’s lineage |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| सीसु | सिर | his head |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| कह | बोले | said |
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
2 यह सबु सुखु मुनिराज तव कृपा कटाच्छ पसाउ।।331।।
‘हे मुनिराज, यह सारा सुख आपकी कृपामयी दृष्टि का प्रसाद है।’
English explanation
‘O great sage, all this happiness is the blessing of your gracious glance.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| सबु | सारा | all |
| सुखु | सुख | happiness |
| मुनिराज | हे मुनियों के राजा विश्वामित्र | O Vishvamitra, foremost of sages |
| तव | आपकी | your |
| कृपा | करुणा | grace |
| कटाच्छ | दृष्टि | glance |
| पसाउ | प्रसाद, अनुग्रह का फल | blessing, gift of favor |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 331
- स्रोत अभिलेख
- 1.331
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 316, 317
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