बालकाण्ड · दोहा 330 · दोहा/सोरठा
बामदेउ अरु देवरिषि बालमीकि जाबालि।
बामदेउ अरु देवरिषि बालमीकि जाबालि।
आए मुनिबर निकर तब कौसिकादि तपसालि।।330।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.33 · पुस्तक पृ. 315, 316
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बामदेउ अरु देवरिषि बालमीकि जाबालि।
वामदेव, देवर्षि नारद, वाल्मीकि और जाबालि—
English explanation
Vamadeva, the divine sage Narada, Valmiki, and Jabali—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बामदेउ | ऋषि वामदेव | the sage Vamadeva |
| अरु | और | and |
| देवरिषि | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| बालमीकि | रामायण के रचयिता ऋषि वाल्मीकि | Valmiki, the sage who composed the Ramayana |
| जाबालि | ऋषि जाबालि | the sage Jabali |
2 आए मुनिबर निकर तब कौसिकादि तपसालि।।330।।
तब विश्वामित्र आदि तपस्वियों सहित श्रेष्ठ मुनियों का समूह आया।
English explanation
Then the assembly of eminent sages arrived, including Vishvamitra and other accomplished ascetics.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आए | आए | arrived |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनियों का | of eminent sages |
| निकर | समूह | the assembly |
| तब | तब | then |
| कौसिकादि | विश्वामित्र आदि | Vishvamitra and others |
| तपसालि | तप से संपन्न | endowed with ascetic discipline |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 330
- स्रोत अभिलेख
- 1.33
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 315, 316
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