बालकाण्ड · दोहा 329 · दोहा/सोरठा
देइ पान पूजे जनक दसरथु सहित समाज।
देइ पान पूजे जनक दसरथु सहित समाज।
जनवासेहि गवने मुदित सकल भूप सिरताज।।329।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.329 · पुस्तक पृ. 314, 315
भावार्थ और शब्दार्थ
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1देइ पान पूजे जनक दसरथु सहित समाज।
पान देकर जनक ने दशरथ और उनके साथ आए समाज का सम्मान किया।
English explanation
Offering betel, Janaka honored Dasharatha together with his company.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देइ | देकर | having given |
| पान | पान; तांबूल | betel preparation |
| पूजे | सम्मान किया | honored |
| जनक | राजा जनक ने; सीता के पिता | King Janaka, Sita’s father |
| दसरथु | राजा दशरथ का; राम के पिता | King Dasharatha, Rama’s father |
| सहित | सहित; साथ | together with |
| समाज | साथ आए लोगों का | his company |
2 जनवासेहि गवने मुदित सकल भूप सिरताज।।329।।
सभी श्रेष्ठ राजा प्रसन्न होकर जनवासे को चले गए।
English explanation
All the foremost kings joyfully departed for the wedding guests’ lodging.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनवासेहि | जनवासे को; बरात के ठहरने के स्थान को | to the wedding guests’ lodging |
| गवने | चले गए | departed |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| सकल | सभी | all |
| भूप | राजा | kings |
| सिरताज | शिरोमणि; सर्वश्रेष्ठ | foremost; crown jewels |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 329
- स्रोत अभिलेख
- 1.329
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 314, 315
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