बालकाण्ड · सोरठा 311 · सोरठा
कहहिं परस्पर नारि बारि बिलोचन पुलक तन।
कहहिं परस्पर नारि बारि बिलोचन पुलक तन।
सखि सबु करब पुरारि पुन्य पयोनिधि भूप दोउ॥ ३११॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.311 · पुस्तक पृ. 292, 292
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कहहिं परस्पर नारि बारि बिलोचन पुलक तन।
स्त्रियाँ आपस में कहती हैं; उनकी आँखों में आँसू हैं और शरीर रोमांचित हैं।
English explanation
The women speak to one another, their eyes filled with tears and their bodies thrilled with goosebumps.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | कहती हैं | say; speak |
| परस्पर | आपस में | to one another |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| बारि | जल; यहाँ आँसू | water; here, tears |
| बिलोचन | आँखों में | in their eyes |
| पुलक | रोमांच; रोंगटे खड़े होना | thrill; goosebumps |
| तन | शरीर में | in their bodies |
2 सखि सबु करब पुरारि पुन्य पयोनिधि भूप दोउ॥ ३११॥
सखी, शिव सब कुछ पूरा करेंगे; दोनों राजा पुण्य के सागर हैं।
English explanation
Friend, Shiva will bring all this about; both kings are oceans of merit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखि | हे सखी | dear friend |
| सबु | सब कुछ | everything; all this |
| करब | करेंगे; पूरा करेंगे | will do; will bring about |
| पुरारि | त्रिपुर के शत्रु शिव | Shiva, destroyer of the three cities |
| पुन्य | पुण्य | merit; virtuous deeds |
| पयोनिधि | सागर | oceans |
| भूप | राजा | kings |
| दोउ | दोनों | both |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- सोरठा 311
- स्रोत अभिलेख
- 1.311
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 292, 292
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