बालकाण्ड · दोहा 312 · दोहा/सोरठा
धेनुधूरि बेला बिमल सकल सुमंगल मूल।
धेनुधूरि बेला बिमल सकल सुमंगल मूल।
बिप्रन्ह कहेउ बिदेह सन जानि सगुन अनुकुल।।312।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.312 · पुस्तक पृ. 293, 294
भावार्थ और शब्दार्थ
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1धेनुधूरि बेला बिमल सकल सुमंगल मूल।
गोधूलि की पवित्र बेला सभी शुभ मंगलों का मूल थी।
English explanation
The pure cow-dust hour at dusk was the source of every auspicious blessing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धेनुधूरि | गायों के लौटने पर उड़ने वाली धूल की | of the dust raised by returning cows |
| बेला | बेला | hour |
| बिमल | निर्मल और पवित्र | pure |
| सकल | सभी | all |
| सुमंगल | शुभ मंगलों का | auspicious blessings |
| मूल | मूल स्रोत | source |
2 बिप्रन्ह कहेउ बिदेह सन जानि सगुन अनुकुल।।312।।
शकुनों को अनुकूल जानकर ब्राह्मणों ने राजा जनक से इस शुभ बेला के विषय में कहा।
English explanation
Recognizing the omens as favorable, the Brahmins told King Janaka about this auspicious hour.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्रन्ह | ब्राह्मणों ने | the Brahmins |
| कहेउ | कहा | told |
| बिदेह | विदेह नरेश जनक | Janaka, king of Videha |
| सन | से | to |
| जानि | जानकर | recognizing |
| सगुन | शकुनों को | the omens |
| अनुकुल | अनुकूल | favorable |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 312
- स्रोत अभिलेख
- 1.312
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 293, 294
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