बालकाण्ड · दोहा 313 · दोहा/सोरठा
भाग्य बिभव अवधेस कर देखि देव ब्रह्मादि।
भाग्य बिभव अवधेस कर देखि देव ब्रह्मादि।
लगे सराहन सहस मुख जानि जनम निज बादि।।313।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.313 · पुस्तक पृ. 294, 294
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भाग्य बिभव अवधेस कर देखि देव ब्रह्मादि।
अयोध्यापति दशरथ का सौभाग्य और वैभव देखकर ब्रह्मा आदि देवता—
English explanation
Seeing the good fortune and splendor of Dasharatha, lord of Ayodhya, Brahma and the other gods—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाग्य | सौभाग्य | good fortune |
| बिभव | वैभव | splendor and prosperity |
| अवधेस | अयोध्यापति दशरथ | Dasharatha, lord of Ayodhya |
| कर | का | of |
| देखि | देखकर | having seen |
| देव | देवता | gods |
| ब्रह्मादि | ब्रह्मा आदि | Brahma and the others |
2 लगे सराहन सहस मुख जानि जनम निज बादि।।313।।
—अपने जन्म को व्यर्थ मानकर हजार मुखों से उनकी सराहना करने लगे।
English explanation
—began praising him with a thousand mouths, considering their own births fruitless.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लगे | लगे | began |
| सराहन | सराहने | to praise |
| सहस | हजार | a thousand |
| मुख | मुखों से | with mouths |
| जानि | जानकर, मानकर | considering |
| जनम | जन्म | birth |
| निज | अपना | their own |
| बादि | व्यर्थ | fruitless |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 313
- स्रोत अभिलेख
- 1.313
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 294, 294
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।