बालकाण्ड · दोहा 314 · दोहा/सोरठा
सिवँ समुझाए देव सब जनि आचरज भुलाहु।
सिवँ समुझाए देव सब जनि आचरज भुलाहु।
हृदयँ बिचारहु धीर धरि सिय रघुबीर बिआहु।।314।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.314 · पुस्तक पृ. 295, 295
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सिवँ समुझाए देव सब जनि आचरज भुलाहु।
शिव ने सभी देवताओं को समझाया: आश्चर्य में पड़कर सुध-बुध मत खोओ।
English explanation
Shiva explained to all the gods: Do not lose your bearings in astonishment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिवँ | शिव ने | Shiva |
| समुझाए | समझाया | explained to |
| देव | देवताओं को | the gods |
| सब | सभी | all |
| जनि | मत | do not |
| आचरज | आश्चर्य में | in astonishment |
| भुलाहु | सुध-बुध खोओ | lose your bearings |
2 हृदयँ बिचारहु धीर धरि सिय रघुबीर बिआहु।।314।।
धैर्य धारण करके हृदय में विचार करो कि यह सीता और रघुवीर राम का विवाह है।
English explanation
Steady yourselves and reflect in your hearts that this is the wedding of Sita and Rama, the hero of Raghu’s lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हृदयँ | हृदय में | in your hearts |
| बिचारहु | विचार करो | reflect |
| धीर | धैर्य | composure |
| धरि | धारण करके | having maintained |
| सिय | सीता का | of Sita |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम का | of Rama, hero of Raghu’s lineage |
| बिआहु | विवाह | wedding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 314
- स्रोत अभिलेख
- 1.314
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 295, 295
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