बालकाण्ड · दोहा 315 · दोहा/सोरठा
राम रूपु नख सिख सुभग बारहिं बार निहारि।
राम रूपु नख सिख सुभग बारहिं बार निहारि।
पुलक गात लोचन सजल उमा समेत पुरारि।।315।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.315 · पुस्तक पृ. 295, 296
भावार्थ और शब्दार्थ
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1राम रूपु नख सिख सुभग बारहिं बार निहारि।
राम के नख से शिख तक सुंदर रूप को बार-बार निहारते हुए—
English explanation
Gazing again and again at Rama's form, beautiful from toenails to crown—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम का | Rama's |
| रूपु | रूप; स्वरूप | form; appearance |
| नख | पैरों के नख से | from the toenails |
| सिख | सिर के शिख तक | to the crown of the head |
| सुभग | सुंदर | beautiful |
| बारहिं | बार ही; बार-बार के प्रयोग का पहला पद | time after; first part of ‘again and again’ |
| बार | बार; पुनः | time; again |
| निहारि | निहारकर; निहारते हुए | gazing upon |
2 पुलक गात लोचन सजल उमा समेत पुरारि।।315।।
उमा सहित शिव का शरीर रोमांचित हो गया और नेत्र आँसुओं से भर गए।
English explanation
Shiva, together with Uma, was thrilled with goosebumps, and their eyes filled with tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुलक | रोमांच; रोंगटे खड़े होना | goosebumps; a thrill |
| गात | शरीर | body |
| लोचन | नेत्र | eyes |
| सजल | आँसुओं से भरे | filled with tears |
| उमा | उमा; पार्वती, शिव की पत्नी | Uma, Parvati, Shiva's consort |
| समेत | सहित | together with |
| पुरारि | त्रिपुर के शत्रु शिव | Shiva, destroyer of Tripura |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 315
- स्रोत अभिलेख
- 1.315
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 295, 296
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