बालकाण्ड · दोहा 310 · दोहा/सोरठा
बारहिं बार सनेह बस जनक बोलाउब सीय।
बारहिं बार सनेह बस जनक बोलाउब सीय।
लेन आइहहिं बंधु दोउ कोटि काम कमनीय।।310।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.31 · पुस्तक पृ. 291, 292
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1बारहिं बार सनेह बस जनक बोलाउब सीय।
स्नेह के वश होकर जनक बार-बार सीता को बुलाएँगे।
English explanation
Moved by affection, Janaka will repeatedly invite Sita home.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बारहिं | बार-बार ही | repeatedly |
| बार | बार; अवसर | time; occasion |
| सनेह | स्नेह के | of affection |
| बस | वश में | under the sway |
| जनक | राजा जनक | King Janaka |
| बोलाउब | बुलाएँगे | will invite |
| सीय | सीता को | Sita |
2 लेन आइहहिं बंधु दोउ कोटि काम कमनीय।।310।।
सीता को लेने दोनों भाई आएँगे, जो करोड़ों कामदेवों से भी अधिक सुंदर हैं।
English explanation
Both brothers, lovelier than millions of love-gods, will come to fetch Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लेन | लेने के लिए | to fetch her |
| आइहहिं | आएँगे | will come |
| बंधु | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
| दोउ | दोनों | both |
| कोटि | करोड़ों | millions of |
| काम | कामदेवों से | than love-gods |
| कमनीय | अधिक सुंदर और मनोहर | lovelier and more enchanting |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 310
- स्रोत अभिलेख
- 1.31
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 291, 292
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।