बालकाण्ड · दोहा 309 · दोहा/सोरठा
रामु सीय सोभा अवधि सुकृत अवधि दोउ राज।
रामु सीय सोभा अवधि सुकृत अवधि दोउ राज।
जहँ जहँ पुरजन कहहिं अस मिलि नर नारि समाज।।।309।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.309 · पुस्तक पृ. 290, 291
भावार्थ और शब्दार्थ
1रामु सीय सोभा अवधि सुकृत अवधि दोउ राज।
राम और सीता सौंदर्य की पराकाष्ठा हैं, और दोनों राजा, जनक तथा दशरथ, पुण्य की पराकाष्ठा हैं।
English explanation
Rama and Sita are the pinnacle of beauty, and the two kings, Janaka and Dasharatha, are the pinnacle of accumulated merit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | राम | Rama, Dasharatha's son |
| सीय | सीता | Sita, Janaka's daughter |
| सोभा | सुंदरता की | of beauty |
| अवधि | पराकाष्ठा | the pinnacle |
| सुकृत | पुण्य की | of accumulated merit |
| अवधि | पराकाष्ठा | the pinnacle |
| दोउ | दोनों | both |
| राज | राजा जनक और दशरथ | kings Janaka and Dasharatha |
2 जहँ जहँ पुरजन कहहिं अस मिलि नर नारि समाज।।।309।।
नगर में जहाँ-जहाँ स्त्री-पुरुषों के समूह एकत्र होते हैं, वहाँ नगरवासी ऐसा कहते हैं।
English explanation
Wherever groups of men and women gather in the city, the townspeople say this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | where |
| जहँ | जहाँ भी | wherever |
| पुरजन | नगरवासी | townspeople |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| अस | ऐसा | this; thus |
| मिलि | मिलकर | having gathered |
| नर | पुरुषों के | of men |
| नारि | स्त्रियों के | of women |
| समाज | समूह | groups; gatherings |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 309
- स्रोत अभिलेख
- 1.309
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 290, 291
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।