बालकाण्ड · दोहा 308 · दोहा/सोरठा
पुरजन परिजन जातिजन जाचक मंत्री मीत।
पुरजन परिजन जातिजन जाचक मंत्री मीत।
मिले जथाबिधि सबहि प्रभु परम कृपाल बिनीत।।308।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.308 · पुस्तक पृ. 290, 290
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1पुरजन परिजन जातिजन जाचक मंत्री मीत।
नगरवासी, परिवारजन, कुल-समुदाय के लोग, याचक, मंत्री और मित्र—
English explanation
Townspeople, family members, people of the clan or community, petitioners, ministers, and friends—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरजन | नगरवासी | townspeople |
| परिजन | परिवारजन | family members |
| जातिजन | कुल या जाति-समुदाय के लोग | members of the clan or community |
| जाचक | याचक; माँगने वाले | petitioners; those seeking gifts |
| मंत्री | मंत्री | ministers |
| मीत | मित्र | friends |
2 मिले जथाबिधि सबहि प्रभु परम कृपाल बिनीत।।308।।
परम कृपालु और विनम्र प्रभु राम उन सभी से उचित रीति से मिले।
English explanation
The supremely gracious and humble Lord Rama greeted them all in the appropriate manner.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिले | मिले | met and greeted |
| जथाबिधि | उचित रीति के अनुसार | in the appropriate manner |
| सबहि | सभी से | all of them |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| परम | अत्यंत | supremely |
| कृपाल | कृपालु | gracious |
| बिनीत | विनम्र | humble |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 308
- स्रोत अभिलेख
- 1.308
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 290, 290
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