बालकाण्ड · दोहा 48 (क) · दोहा/सोरठा
ह्दयँ बिचारत जात हर केहि बिधि दरसनु होइ।
ह्दयँ बिचारत जात हर केहि बिधि दरसनु होइ।
गुप्त रुप अवतरेउ प्रभु गएँ जान सबु कोइ।।48(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.48 · पुस्तक पृ. 69, 70
भावार्थ और शब्दार्थ
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1ह्दयँ बिचारत जात हर केहि बिधि दरसनु होइ।
शिव चलते हुए हृदय में विचार कर रहे थे कि किस प्रकार प्रभु के दर्शन हों।
English explanation
As Shiva went along, he pondered in his heart how he might behold the Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ह्दयँ | हृदय में | in his heart |
| बिचारत | विचार करते हुए | pondering |
| जात | जाते हुए | going along |
| हर | हर अर्थात शिव | Shiva |
| केहि | किस | what; which |
| बिधि | रीति से | by means; in a manner |
| दरसनु | प्रभु के दर्शन | a sight of the Lord |
| होइ | हो सकें | might be possible |
2 गुप्त रुप अवतरेउ प्रभु गएँ जान सबु कोइ।।48(क)।।
प्रभु ने गुप्त रूप में अवतार लिया है; मेरे जाने पर सब लोग उन्हें पहचान लेंगे।
English explanation
The Lord has incarnated in a concealed form; if I go to him, everyone will recognize him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुप्त | छिपे हुए; अप्रकट | concealed |
| रुप | रूप में | in a form |
| अवतरेउ | अवतरित हुए हैं | has incarnated |
| प्रभु | प्रभु राम | the Lord Rama |
| गएँ | मेरे जाने पर | if I go |
| जान | जान लेगा; पहचान लेगा | will recognize |
| सबु | सब | every |
| कोइ | कोई; व्यक्ति | person |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 48 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 1.48
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 69, 70
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।