बालकाण्ड · दोहा 48 (ख) · दोहा/सोरठा
संकर उर अति छोभु सती न जानहिं मरमु सोइ।।
संकर उर अति छोभु सती न जानहिं मरमु सोइ।।
तुलसी दरसन लोभु मन डरु लोचन लालची।।48(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.48 · पुस्तक पृ. 69, 70
भावार्थ और शब्दार्थ
1 संकर उर अति छोभु सती न जानहिं मरमु सोइ।।
शंकर के हृदय में बहुत व्याकुलता थी; सती उसका रहस्य नहीं जानती थीं।
English explanation
Shiva’s heart was greatly agitated; Sati did not know the underlying reason.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संकर | शंकर अर्थात शिव के | Shiva’s |
| उर | हृदय में | in the heart |
| अति | बहुत | great |
| छोभु | व्याकुलता; उद्वेग | agitation; disquiet |
| सती | सती | Sati, Shiva’s wife |
| न | नहीं | not |
| जानहिं | जानती थीं | knew |
| मरमु | भीतरी कारण; रहस्य | underlying reason; secret |
| सोइ | वह; उसी को | that |
2 तुलसी दरसन लोभु मन डरु लोचन लालची।।48(ख)।।
तुलसी कहते हैं: शिव को दर्शन की तीव्र लालसा थी, मन में डर था और आँखें दर्शन के लिए लालायित थीं।
English explanation
Tulsidas says: Shiva longed intensely for a sight of the Lord; his mind was fearful, while his eyes yearned to see him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुलसी | कवि तुलसीदास कहते हैं | the poet Tulsidas says |
| दरसन | प्रभु के दर्शन का | for a sight of the Lord |
| लोभु | तीव्र लालसा | intense longing |
| मन | मन में | in the mind |
| डरु | भय | fear |
| लोचन | नेत्र | eyes |
| लालची | दर्शन के लिए लालायित | eager to behold him |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 48 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 1.48
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 69, 70
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।