बालकाण्ड · दोहा 49 · दोहा/सोरठा
अति विचित्र रघुपति चरित जानहिं परम सुजान।
अति विचित्र रघुपति चरित जानहिं परम सुजान।
जे मतिमंद बिमोह बस हृदयँ धरहिं कछु आन।।49।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.49 · पुस्तक पृ. 70, 71
भावार्थ और शब्दार्थ
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1अति विचित्र रघुपति चरित जानहिं परम सुजान।
राम का चरित्र अत्यंत अद्भुत है; उसे परम विवेकशील लोग जानते हैं।
English explanation
Rama’s deeds are exceedingly wondrous; the truly discerning understand them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| विचित्र | अद्भुत | wondrous |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम का | of Rama, lord of Raghu’s line |
| चरित | चरित्र; आचरण और लीलाएँ | deeds and conduct |
| जानहिं | जानते हैं | understand |
| परम | अत्यंत; सर्वोच्च रूप से | supremely |
| सुजान | विवेकशील ज्ञानी | discerning and wise people |
2 जे मतिमंद बिमोह बस हृदयँ धरहिं कछु आन।।49।।
जो मंदबुद्धि और मोह के वश हैं, वे हृदय में कुछ और ही धारणा रखते हैं।
English explanation
Those of dull understanding, under the sway of delusion, hold a different notion in their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| मतिमंद | मंदबुद्धि हैं | are of dull understanding |
| बिमोह | गहरे मोह | deep delusion |
| बस | के वश में | under the sway of |
| हृदयँ | हृदय में | in their hearts |
| धरहिं | धारण करते हैं | hold |
| कछु | कुछ | some |
| आन | अन्य धारणा; कुछ और | other notion; something different |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 49
- स्रोत अभिलेख
- 1.49
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 70, 71
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