बालकाण्ड · दोहा 47 · दोहा/सोरठा
कहउँ सो मति अनुहारि अब उमा संभु संबाद।
कहउँ सो मति अनुहारि अब उमा संभु संबाद।
भयउ समय जेहि हेतु जेहि सुनु मुनि मिटिहि बिषाद।।47।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.47 · पुस्तक पृ. 69, 69
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कहउँ सो मति अनुहारि अब उमा संभु संबाद।
अब मैं अपनी बुद्धि के अनुसार उमा और शिव का वह संवाद कहता हूँ।
English explanation
I shall now recount that dialogue between Uma and Shiva according to my understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I shall recount |
| सो | वह | that |
| मति | अपनी बुद्धि के | my understanding |
| अनुहारि | अनुसार | according to |
| अब | अब | now |
| उमा | देवी उमा | the goddess Uma |
| संभु | शिव | Shiva |
| संबाद | संवाद | dialogue |
2 भयउ समय जेहि हेतु जेहि सुनु मुनि मिटिहि बिषाद।।47।।
वह संवाद जिस समय और जिस कारण हुआ, वह सुनिए, हे मुनि; आपका विषाद मिट जाएगा।
English explanation
Hear, O sage, when and for what reason that dialogue took place; your distress will pass away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | हुआ | took place |
| समय | समय | time |
| जेहि | जिस | at which |
| हेतु | कारण | reason |
| जेहि | जिस | for which |
| सुनु | सुनिए | listen |
| मुनि | हे ऋषि | O sage |
| मिटिहि | मिट जाएगा | will be dispelled |
| बिषाद | विषाद; मन का दुःख | distress; sorrow |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 47
- स्रोत अभिलेख
- 1.47
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 69, 69
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।