बालकाण्ड · दोहा 46 · दोहा/सोरठा
प्रभु सोइ राम कि अपर कोउ जाहि जपत त्रिपुरारि।
प्रभु सोइ राम कि अपर कोउ जाहि जपत त्रिपुरारि।
सत्यधाम सर्बग्य तुम्ह कहहु बिबेकु बिचारि।।46।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.46 · पुस्तक पृ. 68, 68
भावार्थ और शब्दार्थ
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1प्रभु सोइ राम कि अपर कोउ जाहि जपत त्रिपुरारि।
हे प्रभु, त्रिपुरारि शिव जिनका नाम जपते हैं, वे वही राम हैं या कोई दूसरे?
English explanation
O lord, is the Rama whose name Shiva repeats that same Rama, or someone else?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | हे स्वामी | O lord |
| सोइ | वही | that same |
| राम | राम | Rama |
| कि | या | or |
| अपर | दूसरा | other |
| कोउ | कोई | someone |
| जाहि | जिनका नाम | whose name |
| जपत | जपते हैं | repeats in devotion |
| त्रिपुरारि | त्रिपुर के विनाशक शिव | Shiva, destroyer of Tripura |
2 सत्यधाम सर्बग्य तुम्ह कहहु बिबेकु बिचारि।।46।।
आप सत्य के धाम और सर्वज्ञ हैं; विवेकपूर्वक विचारकर बताइए।
English explanation
You are the abode of truth and all-knowing; consider with discernment and tell me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत्यधाम | सत्य के धाम | abode of truth |
| सर्बग्य | सब जानने वाले | all-knowing |
| तुम्ह | आप | you |
| कहहु | बताइए | please tell |
| बिबेकु | विवेक; यथार्थ का भेदज्ञान | discernment |
| बिचारि | विचारकर | having considered |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 46
- स्रोत अभिलेख
- 1.46
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 68, 68
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