बालकाण्ड · दोहा 135 · दोहा/सोरठा
होहु निसाचर जाइ तुम्ह कपटी पापी दोउ।
मूल पाठ
होहु निसाचर जाइ तुम्ह कपटी पापी दोउ।
हँसेहु हमहि सो लेहु फल बहुरि हँसेहु मुनि कोउ।।135।।
स्रोत अभिलेख 1.135 · पुस्तक पृ. 144, 145
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुम दोनों कपटी और पापी जाकर राक्षस हो जाओ। तुमने हमारी हँसी की, उसका फल चखो। अब फिर किसी मुनिकी हँसी करना॥ १३५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 145 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1होहु निसाचर जाइ तुम्ह कपटी पापी दोउ।
English explanation
Go and become demons, you two deceitful sinners.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होहु | हो जाओ | become |
| निसाचर | राक्षस | demons |
| जाइ | जाकर | go and |
| तुम्ह | तुम | you |
| कपटी | छल करने वाले | deceitful |
| पापी | पाप करने वाले | sinners |
| दोउ | दोनों | both |
2 हँसेहु हमहि सो लेहु फल बहुरि हँसेहु मुनि कोउ।।135।।
English explanation
You mocked me, so receive the consequence of that; then try mocking another sage!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हँसेहु | तुमने उपहास किया | you mocked |
| हमहि | मेरा ही | me |
| सो | उसका | of that |
| लेहु | लो; भोगो | receive; suffer |
| फल | फल; परिणाम | the consequence |
| बहुरि | फिर | then again |
| हँसेहु | उपहास करके देखना | try mocking |
| मुनि | किसी मुनि का | a sage |
| कोउ | कोई | any |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 135
- स्रोत अभिलेख
- 1.135
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 145
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 144, 145
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।