बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि जल दीख रूप निज पावा। तदपि हृदयँ संतोष न आवा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमुनिने फिर जलमें देखा, तो उन्हें अपना (असली) रूप प्राप्त हो गया; तब भी उन्हें सन्तोष नहीं हुआ। उनके ओंठ फड़क रहे थे और मनमें क्रोध [भरा] था। तुरंत ही वे भगवान् कमलापतिके पास चले॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 145 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पुनि जल दीख रूप निज पावा। तदपि हृदयँ संतोष न आवा।।
फरकत अधर कोप मन माहीं। सपदी चले कमलापति पाहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.136 · पुस्तक पृ. 145, 146
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुनि जल दीख रूप निज पावा। तदपि हृदयँ संतोष न आवा।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Narada looked into the water again and found his own natural form restored; even then, his heart felt no satisfaction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| जल | जल में | in the water |
| दीख | देखा | looked |
| रूप | स्वरूप | form |
| निज | अपना | his own |
| पावा | पाया | found restored |
| तदपि | फिर भी | even so |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| संतोष | संतुष्टि | satisfaction |
| न | नहीं | not |
| आवा | आई | came |
2 फरकत अधर कोप मन माहीं। सपदी चले कमलापति पाहीं।।
English explanation
His lips were trembling and anger filled his mind. Narada immediately set out toward Vishnu, Lakshmi’s consort.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फरकत | फड़कते हुए | trembling |
| अधर | होंठ | lips |
| कोप | क्रोध | anger |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | within |
| सपदी | तुरंत | immediately |
| चले | चल पड़े | set out |
| कमलापति | लक्ष्मी के पति विष्णु | Vishnu, Lakshmi’s consort |
| पाहीं | के पास | toward |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.136
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 145
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 145, 146
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।