बालकाण्ड · दोहा 166 · दोहा/सोरठा
होहिं बिप्र बस कवन बिधि कहहु कृपा करि सोउ।
होहिं बिप्र बस कवन बिधि कहहु कृपा करि सोउ।
तुम्ह तजि दीनदयाल निज हितू न देखउँ कोउँ।।166।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.166 · पुस्तक पृ. 169, 170
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1होहिं बिप्र बस कवन बिधि कहहु कृपा करि सोउ।
कृपा करके यह भी बताइए कि ब्राह्मण किस उपाय से मेरे वश में होंगे।
English explanation
Please also tell me how the Brahmins may come under my influence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होहिं | होंगे; हो सकते हैं | may become |
| बिप्र | ब्राह्मण | Brahmins |
| बस | वश में | under control |
| कवन | किस | what |
| बिधि | विधि से; उपाय से | by what method |
| कहहु | बताइए | tell me |
| कृपा | कृपा | kindness |
| करि | करके | showing |
| सोउ | वह भी | that also |
2 तुम्ह तजि दीनदयाल निज हितू न देखउँ कोउँ।।166।।
हे दीनदयाल, तुम्हारे सिवा मुझे अपना कोई हितैषी नहीं दिखाई देता।
English explanation
O compassionate one toward the helpless, I see no well-wisher of mine besides you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम्हें | you |
| तजि | छोड़कर; सिवा | except for |
| दीनदयाल | हे दीनों पर दया करने वाले | O compassionate one toward the helpless |
| निज | अपना | my own |
| हितू | हितैषी | well-wisher |
| न | नहीं | not |
| देखउँ | देखता हूँ | I see |
| कोउँ | कोई | anyone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 166
- स्रोत अभिलेख
- 1.166
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 169, 170
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