बालकाण्ड · दोहा 167 · दोहा/सोरठा
अस कहि गहे नरेस पद स्वामी होहु कृपाल।
अस कहि गहे नरेस पद स्वामी होहु कृपाल।
मोहि लागि दुख सहिअ प्रभु सज्जन दीनदयाल।।167।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.167 · पुस्तक पृ. 170, 171
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 अस कहि गहे नरेस पद स्वामी होहु कृपाल।
ऐसा कहकर राजा ने उनके चरण पकड़ लिए और कहा, ‘हे स्वामी, कृपालु होइए।’
English explanation
Saying this, the king clasped his feet and said, ‘Master, be gracious.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| गहे | पकड़ लिए | clasped |
| नरेस | राजा ने | the king |
| पद | चरण | feet |
| स्वामी | हे स्वामी | O master |
| होहु | होइए | be |
| कृपाल | कृपालु | gracious |
2 मोहि लागि दुख सहिअ प्रभु सज्जन दीनदयाल।।167।।
हे प्रभु, आप सज्जन और दीनों पर दया करने वाले हैं; मेरे लिए यह कष्ट सह लीजिए।
English explanation
O lord, noble and compassionate toward the needy, please endure this hardship for my sake.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मेरे | me |
| लागि | लिए | for the sake of |
| दुख | कष्ट | hardship |
| सहिअ | सह लीजिए | please endure |
| प्रभु | हे प्रभु | O lord |
| सज्जन | सज्जन; भले व्यक्ति | noble; virtuous |
| दीनदयाल | दीनों पर दया करने वाले | compassionate toward the needy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 167
- स्रोत अभिलेख
- 1.167
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 170, 171
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