बालकाण्ड · दोहा 168 · दोहा/सोरठा
नित नूतन द्विज सहस सत बरेहु सहित परिवार।
नित नूतन द्विज सहस सत बरेहु सहित परिवार।
मैं तुम्हरे संकलप लगि दिनहिंकरिब जेवनार।।168।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.168 · पुस्तक पृ. 171, 172
भावार्थ और शब्दार्थ
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1नित नूतन द्विज सहस सत बरेहु सहित परिवार।
प्रतिदिन नए एक लाख ब्राह्मणों को उनके परिवारों सहित निमंत्रित करो।
English explanation
Each day invite a fresh group of one hundred thousand Brahmins, together with their families.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नित | प्रतिदिन | daily |
| नूतन | नए; पहले से भिन्न | new; different from before |
| द्विज | ब्राह्मणों को | Brahmins |
| सहस | हजार | thousand |
| सत | सौ | hundred |
| बरेहु | निमंत्रित करो | invite |
| सहित | सहित; साथ | together with |
| परिवार | परिवार | their families |
2 मैं तुम्हरे संकलप लगि दिनहिंकरिब जेवनार।।168।।
तुम्हारा संकल्प पूरा होने तक मैं प्रतिदिन भोज तैयार करूँगा।
English explanation
Until your vow is completed, I will prepare the feast daily.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं | I |
| तुम्हरे | तुम्हारे | your |
| संकलप | संकल्प | vow |
| लगि | पूरा होने तक | until its completion |
| दिनहिंकरिब | प्रतिदिन करूँगा | will prepare daily |
| जेवनार | भोज; भोजन की व्यवस्था | feast; meal preparation |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 168
- स्रोत अभिलेख
- 1.168
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 171, 172
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