बालकाण्ड · दोहा 169 · दोहा/सोरठा
मैं आउब सोइ बेषु धरि पहिचानेहु तब मोहि।
मैं आउब सोइ बेषु धरि पहिचानेहु तब मोहि।
जब एकांत बोलाइ सब कथा सुनावौं तोहि।।169।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.169 · पुस्तक पृ. 172, 172
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1मैं आउब सोइ बेषु धरि पहिचानेहु तब मोहि।
मैं उसी पुरोहित का वेश धारण करके आऊँगा; तब मुझे पहचान लेना—
English explanation
I will come assuming that priest's guise; recognize me then—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं | I |
| आउब | आऊँगा | will come |
| सोइ | वही | that same |
| बेषु | वेश | guise |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| पहिचानेहु | पहचान लेना | recognize |
| तब | तब | then |
| मोहि | मुझे | me |
2 जब एकांत बोलाइ सब कथा सुनावौं तोहि।।169।।
जब मैं तुम्हें एकांत में बुलाकर सारी कथा सुनाऊँ।
English explanation
when I call you aside in private and tell you the whole account.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| एकांत | एकांत में | in private |
| बोलाइ | बुलाकर | having called you |
| सब | सारी | the whole |
| कथा | कथा | account |
| सुनावौं | सुनाऊँ | I tell |
| तोहि | तुम्हें | to you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 169
- स्रोत अभिलेख
- 1.169
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 172, 172
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