बालकाण्ड · दोहा 170 · दोहा/सोरठा
रिपु तेजसी अकेल अपि लघु करि गनिअ न ताहु।
रिपु तेजसी अकेल अपि लघु करि गनिअ न ताहु।
अजहुँ देत दुख रबि ससिहि सिर अवसेषित राहु।।170।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.17 · पुस्तक पृ. 172, 173
भावार्थ और शब्दार्थ
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1रिपु तेजसी अकेल अपि लघु करि गनिअ न ताहु।
तेजस्वी शत्रु अकेला भी हो, तो उसे छोटा समझकर तुच्छ नहीं मानना चाहिए।
English explanation
Even if a formidable enemy is alone, one should not regard him as insignificant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिपु | शत्रु | enemy |
| तेजसी | तेजस्वी; प्रबल | formidable; powerful |
| अकेल | अकेला | alone |
| अपि | भी | even |
| लघु | छोटा; तुच्छ | small; insignificant |
| करि | समझकर; मानकर | considering as |
| गनिअ | गिनना चाहिए; समझना चाहिए | should be reckoned; regarded |
| न | नहीं | not |
| ताहु | उसे भी | even him |
2 अजहुँ देत दुख रबि ससिहि सिर अवसेषित राहु।।170।।
केवल सिर शेष रह जाने पर भी राहु आज तक सूर्य और चंद्रमा को दुःख देता है।
English explanation
Though only his head remains, Rahu still afflicts the sun and the moon.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अजहुँ | अब भी | even now |
| देत | देता है | gives; causes |
| दुख | दुःख; पीड़ा | suffering; affliction |
| रबि | सूर्य को | the sun |
| ससिहि | चंद्रमा को | the moon |
| सिर | सिर मात्र | only the head |
| अवसेषित | शेष रह गया | remaining; left over |
| राहु | राहु, ग्रहण से संबद्ध पौराणिक असुर | Rahu, the mythic demon associated with eclipses |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 170
- स्रोत अभिलेख
- 1.17
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 172, 173
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