बालकाण्ड · दोहा 171 · दोहा/सोरठा
राजा के उपरोहितहि हरि लै गयउ बहोरि।
राजा के उपरोहितहि हरि लै गयउ बहोरि।
लै राखेसि गिरि खोह महुँ मायाँ करि मति भोरि।।171।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.171 · पुस्तक पृ. 173, 174
भावार्थ और शब्दार्थ
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1राजा के उपरोहितहि हरि लै गयउ बहोरि।
फिर वह राजा के पुरोहित को अपहरण करके ले गया।
English explanation
Then he abducted the king’s priest and took him away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राजा | राजा | the king |
| के | के | of |
| उपरोहितहि | पुरोहित को | the priest |
| हरि | हरण करके | abducting |
| लै | लेकर | taking |
| गयउ | गया | went away |
| बहोरि | फिर | then |
2 लै राखेसि गिरि खोह महुँ मायाँ करि मति भोरि।।171।।
उसे ले जाकर, माया से उसकी बुद्धि भ्रमित करके, पर्वत की गुफा में रख दिया।
English explanation
Taking him away, he bewildered his mind through magic and kept him in a mountain cave.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लै | ले जाकर | taking him away |
| राखेसि | उसने रख दिया | he kept him |
| गिरि | पर्वत की | mountain |
| खोह | गुफा | cave |
| महुँ | में | in |
| मायाँ | माया | magic |
| करि | करके | employing |
| मति | बुद्धि को | his mind |
| भोरि | भ्रमित करके | having bewildered |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 171
- स्रोत अभिलेख
- 1.171
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 173, 174
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