बालकाण्ड · दोहा 323 · दोहा
होम समय तनु धरि अनलु अति सुख आहुति लेहिं।
होम समय तनु धरि अनलु अति सुख आहुति लेहिं।
बिप्र बेष धरि बेद सब कहि बिबाह बिधि देहिं॥ ३२३॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.323 · पुस्तक पृ. 304, 304
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1होम समय तनु धरि अनलु अति सुख आहुति लेहिं।
होम के समय अग्निदेव शरीर धारण करके अत्यंत आनंद से आहुति स्वीकार करते हैं।
English explanation
At the time of the fire offering, the fire god assumes bodily form and joyfully accepts the oblations.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होम | अग्नि में आहुति देने का अनुष्ठान | the fire-offering ritual |
| समय | के समय | at the time of |
| तनु | शरीर | bodily form |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| अनलु | अग्निदेव | the fire god |
| अति | अत्यंत | great |
| सुख | आनंद से | with joy |
| आहुति | अग्नि में अर्पित हवि | oblations offered into the fire |
| लेहिं | स्वीकार करते हैं | accepts |
2बिप्र बेष धरि बेद सब कहि बिबाह बिधि देहिं॥ ३२३॥
सभी वेद ब्राह्मणों का वेश धारण करके विवाह की विधि बता देते हैं।
English explanation
All the Vedas assume the guise of Brahmins and explain the prescribed marriage rites.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्र | ब्राह्मण का | of Brahmins |
| बेष | वेश | guise |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| बेद | वेद | the Vedas |
| सब | सभी | all |
| कहि | कहकर | by explaining |
| बिबाह | विवाह की | of marriage |
| बिधि | अनुष्ठान-विधि | prescribed ritual procedure |
| देहिं | बता देते हैं | set forth |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 323
- स्रोत अभिलेख
- 1.323
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 304, 304
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।