बालकाण्ड · दोहा 322 · दोहा
सोहति बनिता बृंद महुँ सहज सुहावनि सीय।
सोहति बनिता बृंद महुँ सहज सुहावनि सीय।
छबि ललना गन मध्य जनु सुषमा तिय कमनीय॥ ३२२॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.322 · पुस्तक पृ. 303, 303
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सोहति बनिता बृंद महुँ सहज सुहावनि सीय।
स्वभावतः सुंदर सीता स्त्रियों के समूह के बीच शोभायमान हैं।
English explanation
Naturally lovely Sita shines amid the gathering of women.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोहति | शोभा पाती हैं | shines beautifully |
| बनिता | स्त्रियों का | of women |
| बृंद | समूह | gathering |
| महुँ | में; बीच में | in; amid |
| सहज | स्वभाव से | by nature |
| सुहावनि | सुंदर और मनोहर | lovely and charming |
| सीय | सीता | Sita |
2छबि ललना गन मध्य जनु सुषमा तिय कमनीय॥ ३२२॥
मानो छवि-रूपी स्त्रियों के समूह में स्वयं सुषमा एक मनोहर स्त्री का रूप धारण करके शोभित हो।
English explanation
It is as though beauty itself, embodied as a lovely woman, stood amid a company of women embodying loveliness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छबि | छवि; सुंदरता | loveliness |
| ललना | स्त्रियाँ | women |
| गन | समूह | company |
| मध्य | बीच में | amid |
| जनु | मानो | as though |
| सुषमा | सुषमा; अनुपम सुंदरता | beauty itself |
| तिय | स्त्री के रूप में | in the form of a woman |
| कमनीय | अत्यंत मनोहर | exquisitely lovely |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 322
- स्रोत अभिलेख
- 1.322
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 303, 303
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