बालकाण्ड · दोहा 321 · दोहा
रामचंद्र मुख चंद्र छबि लोचन चारु चकोर।
रामचंद्र मुख चंद्र छबि लोचन चारु चकोर।
करत पान सादर सकल प्रेमु प्रमोदु न थोर॥ ३२१॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.321 · पुस्तक पृ. 302, 302
भावार्थ और शब्दार्थ
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1रामचंद्र मुख चंद्र छबि लोचन चारु चकोर।
रामचंद्र के चंद्रमा जैसे मुख की शोभा को सभी के सुंदर, चकोर-समान नेत्र निहार रहे हैं।
English explanation
Everyone’s lovely, chakora-like eyes gaze upon the beauty of Ramachandra’s moonlike face.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामचंद्र | श्रीराम के | of Rama |
| मुख | मुख | face |
| चंद्र | चंद्रमा के समान | moonlike |
| छबि | शोभा | beauty |
| लोचन | नेत्र | eyes |
| चारु | सुंदर | lovely |
| चकोर | चकोर पक्षी के समान | like chakora birds |
2करत पान सादर सकल प्रेमु प्रमोदु न थोर॥ ३२१॥
सभी आदरपूर्वक उस शोभा का नेत्रों से पान कर रहे हैं; उनका प्रेम और आनंद कम नहीं, अत्यधिक है।
English explanation
All reverently drink in that beauty with their eyes; their love and delight are immense.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करत | कर रहे हैं | are doing |
| पान | पान; नेत्रों से रस लेना | drinking in |
| सादर | आदरपूर्वक | reverently |
| सकल | सभी | all |
| प्रेमु | प्रेम | love |
| प्रमोदु | हर्ष; आनंद | delight |
| न | नहीं | not |
| थोर | थोड़ा; कम | little |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 321
- स्रोत अभिलेख
- 1.321
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 302, 302
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।